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मेरी मिट्टी चैलेंज

ग्रामीण महिलाओं के जीवन को सशक्त और मौलिक रूप से बेहतर बनाने के लिए समाधान आमंत्रण
25 लाख तक प्रारंभिक अनुदान | आवेदन समय सीमा: जुलाई 25
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प्रसंग

ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाये भारतीय कृषि की रीढ़ हैंIआर्थिक रूप से सक्रिय भारतीय ग्रामीण महिलाओं में से 86% खेती के कामों में हैं, जबकि पुरुष नौकरी के लिए शहर चले जाते हैं I कृषि अर्थव्यवस्था में उनकी अधिक भागीदारी के बावजूद,बमुश्किल 14% भारतीय ग्रामीण महिलाये ही जमीन की मालिक हैं I

जो महिलाएं जमीन की स्वामिनी है  उन्हें उससे होने वाले  फायदों को अच्छी तरह से दस्तावेजों में उल्लिखित किया गया है  इसके अलावा  वे शारीरिक रूप से अधिक सुरक्षित और  आर्थिक रूप से अधिक स्वतंत्र हैंI उनके परिवारों में बेहतर पोषण और स्वास्थ्य के बेहतर नतीजे देखने को मिलते हैंI गांव की महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कई तरह से योगदान करती हैं जैसे जमीन आधारित आजीविका जिसमें खेती, वानिकी, मत्स्य पालन और पशुओं को  चराना भी शामिल है, यह गांव की महिलाएं जिस ज़मीन पर काम करती है, उस ज़मीन पर उनको शायद ही कोई अधिकार है, और नIहीं कोई कानूनी दस्तावेज हैI ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को मिले हुए असमान मौकों को कोविड-19 महामारी ने और भी बदतर किया हैIपूर्व में हुई बीमारियों के साक्ष्यI यह बताते हैं की जब परिवार का कोई पुरुष सदस्य गुजर जाता है उस हालत में  वे विधवाएँ, पुरुष रिश्तेदारों द्वारा  जमीन हड़पने के प्रति बहुत ही संवेदनशील होती हैंI लिंग आधारित हिंसा बढ़ जाती है क्योंकि परिवार बहुत लंबे समय के लिए घरों में ही कैद रहते हैं

उद्देश्य

‘मेरी मिट्टी’ के साथ हमारा उद्देश्य ग्रामीण संगठनों को  ग्रामीण समुदायों में महिलाओं के लिए भूमि प्राप्ति और स्वामित्व में सुधार के लिए  परिवर्तनात्मक समाधान विकसित करने और मौजूदा हस्तक्षेपों को बेहतर बनाने में सहायता करना है।

हम उन आवेदनों को आमत्रित कर रहे हैं जो ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं की पहुंच में सुधार करना चाहते हैं
भूमि आधारित आजीविका
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महिलाओं की भूमि आधारित आजीविका में बाधाएं

ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं की कोशिश उनकी कुछ चीजों की पहुंच पर निर्भर करती है जैसे जमीन, पशुधन, सूचना, कर्ज, मजदूर और उपकरणI उत्पादन के इन साधनों तक महिलाओं की पहुँच में पर्याप्त अंतराल और असमानताएँ हैं, और सरकार का बुनियादी ढांचा अक्सर पुरुषों के प्रति पक्षपाती होता हैI भूमि आधारित आजीविका (कृषि, मत्स्य पालन, पशुचारण आदि) की खोज में महिलाओं के सामने आने वाली बुनियादी बाधाओं को दूर करने के लिए, हम उन समाधानों की तलाश कर रहे हैं:
A- महिलाओं को पद/उपाधियों के माध्यम से भूमि  तक पहुँच प्रदान करना (जैसे वन अधिकार अधिनियम, 2006 के माध्यम से), जो  जमानत के रूप में काम करती है और ऋण और भूमि-आधारित सरकारी योजनाओं तक पहुँच को आसान करके महिलाओं की उत्पादकता में सुधार करती है  जैसे PM-KISAN
B- भूमि आधारित आजीविका के लिए निवेश और सूचना वितरण प्रणाली में महिलाओं पर ध्यान केंद्रित करके अधिक महिला एजेंटों या पुरुष एजेंटों को फिर से अनुकूल बनाना।
C- महिलाओं को आर्थिक सहायता (जैसे माइक्रोक्रिडिट) प्रदान करें और उनके सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाएं, जिससे रिश्तेदारों पर उनकी निर्भरता कम हो
D- निवेश तक पहुँचने में महिलाओं के समूहों द्वारा सामूहिक  काम को बढ़ावा देना (जैसे खेती करने के लिए भूमि का होना) और बाजारों तक पहुंचना
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कानूनी सहायता
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महिलाओं के भूमि अधिकारों के लिए कानूनी बाधाएं

जबकि 2000 के बाद से कई नियमों को भूमि अधिकारों को बराबर करने के लिए तैयार किया गया है,वास्तविकता यह है कि:
 (a) चूंकि विरासत जैसे विषय व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत आते हैं, इसलिए हिंदू उत्तराधिकार कानूनों, व्यक्तिगत शरिया कानूनों के बीच अभी भी विसंगतियां हैं; और कोई एकरूपता देशव्यापी नहीं है क्योंकि उत्तराधिकार कानूनों और विभिन्न राज्यों में दस कानूनों में विभिन्न संशोधन हैं, और  बहुत कुछ
 (b) ग्रामीण समुदायों में कानूनी परिवर्तनों की पहुंच सत्ता संरचना और कानूनी साक्षरता और शिक्षा की कमी से बहुत मुश्किल है। 

महिलाओं के भूमि अधिकारों के  बीच में आने वाली  कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए हम उन समाधानों की तलाश कर रहे हैं जो महिलाओं की सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए मदद करते हैं:
A- महिलाओं  के भूमि और संपत्ति के अधिकारों से संबंधित कानूनी जानकारी को सरल और प्रसारित करना,विशेष रूप से तकनीक के नेतृत्व वाले चैनल के माध्यम सेI उदाहरण के लिए, सामुदायिक रेडियो,IVRS and SMS
B- दावों को आगे बढ़ाने और ग्रामीण महिलाओं को जटिल भूमि नियमों और आदेशों में निर्धारित प्रक्रियाओं के मार्गदर्शन में मदद करके कानूनी सहायता प्रदान करें
C- महिलाओं के लिए पहले से मौजूद विवाद समाधान तंत्रों को नया रूप देना या उनमें सुधार करना
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संस्थागत समर्थन
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महिलाओं के भूमि अधिकारों के बीच में आने वाली संस्थागत बाधाएं

ग्रामीण और जनजातीय समुदाय नीतियों, कल्याणकारी योजनाओं और भूमि सुधारों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए स्थानीय से जिला स्तर के अधिकारियों पर निर्भर करते हैं। स्थानीय शासन में सुधार लाने, कल्याणकारी योजनाओं को लक्षित करने और भूमि के लिए रिकॉर्ड रखने की पहल पहले से ही चल रही है। उदाहरण के लिए: भारत में डिजिटाइज्ड लैंड रिकॉर्ड ग्रामीण क्षेत्रों के Survey of Villages and Mapping with Improved Technology in Village Areas (SVAMITVA) योजना के तहत शुरू किए गए हैं और एक GIS लैंड बैंक प्रणाली 6 राज्यों में अपना पायलट चला रही है।ऐसी योजनाओं में तेजी लाने, और ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं  की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए:

हम उन समाधानों  को खोज रहे हैं जो :
A- बेहतर भूमि रिकॉर्ड और डेटा संग्रह और प्रबंधन को बढ़ावा दें  और विशेष रूप से भूमि और संपत्ति के महिलाओं के शेयरों को रिकॉर्ड करें 
B- जवाबदेह और पारदर्शी संस्थानों का विकास करें; भ्रष्टाचार कम करें
C- महिलाओं के लिए भूमि  अधिकार/ पद  को बढ़ावा दें; महिलाओं के भूमि संबंधी दावों को उनके घरों और परिवारों से अलग करें
D- संचालन को डिजाइन करने के लिए स्थानीय सरकार की क्षमता का निर्माण करें और  उन व्यवहारों को बढ़ावा दें जो  लैंगिक-मुख्यधारा  जमीनी स्तर पर भूमि कानूनों को लागू करती है . उदाहरण के लिए, उन स्थानों पर बैठकें आयोजित करना जो महिलाओं के लिए आसानी से सुलभ हैं; भूमि शीर्षक दस्तावेजों पर महिला का नाम शामिल करना
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सामाजिक समानता
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महिलाओं के भूमि अधिकारों के  बीच में आने वाली सामाजिक बाधाएँ

भले ही कानून और संस्थाएं लैंगिक-समान हों, लेकिन महिलाओं के दावों को तब तक मान्यता नहीं दी जाएगी जब तक कि सामाजिक दृष्टिकोण और मानदंड नहीं बदलते. उदाहरण के लिए, माता-पिता अभी भी अपने पुरुष उत्तराधिकारियों को अपनी भूमि छोड़ सकते हैं; बहनें जानबूझकर अपने भाइयों के पक्ष में अपनी पारिवारिक संपत्ति को त्याग सकती हैं. इसके अतिरिक्त, एक महिला की 'सही' भूमिका या कम क्षमता की रूढ़िवादी धारणाएं ऐसी बाधाएं हैं जो उन्हें सार्वजनिक गतिशीलता या बातचीत से रोकती  हैं जो उन्हें अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मदद नहीं  करती हैं।

महिलाओं के भूमि अधिकारों के  बीच में आने वाली सामाजिक बाधाओं को दूर करने के लिए, हम उन समाधानों की तलाश कर रहे हैं जो:
A- लड़कियों, महिलाओं, समुदायों और अन्य सहयोगियों को  लिंग समानता के बारे में और भूमि और संपत्ति के अधिकारों को प्राप्त करने के बारे में  शिक्षा प्रदान करना
B- ऐसी नयी  सेवाएँ प्रदान करें जो महिलाओं को उनके भूमि अधिकारों तक पहुँचने और उपयोग करने में मदद करें. उदाहरण के लिए, लिंग आधारित डिजिटल विभाजन को बंद करने से लड़कियों और महिलाओं को ऑनलाइन भूमि प्लेटफार्मों का उपयोग करने और जानकारी तक पहुंचने में सक्षम बनाया जा सकता है
C- लिंग-प्रगतिशील भूमिकाओं को प्रोजेक्ट करने के लिए लोकप्रिय मीडिया का उपयोग करें जो सामाजिक दृष्टिकोण को बदलने में मदद करते हैं
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अवधि

प्रस्तुत करने

गतिविधि

चरण 1

जुलाई 1 - जुलाई 25
संक्षेप-
आवेदन फॉर्म के माध्यम से
ज्ञान श्रृंखला (ऑनलाइन सत्र)
रजिस्टर करें

चरण 2

जुलाई 30 - अगस्त 16
विस्तृत नई पहल/
स्टार्ट अप योजना
विशेषज्ञों के प्रमुख समूह से जुड़ें

चरण 3

अगस्त चौथा सप्ताह
जूरी के लिए
अंतिम प्रस्तुति
अंतिम विजेताओं को हमारे लॉन्चपैड पर आमंत्रित किया जाता है और डाउनस्ट्रीम भागीदारों तक पहुंच प्रदान की जाती है

चरण 1

जुलाई 1 - जुलाई 25
संक्षेप-
आवेदन फॉर्म के माध्यम से
ज्ञान और संवाद श्रृंखला
(ऑनलाइन सत्र)

चरण 2

जुलाई 30 - अगस्त 8
विस्तृत नई पहल/
स्टार्ट अप योजना
विशेषज्ञों के प्रमुख समूह से जुड़ें

चरण 3

अगस्त तीसरा सप्ताह
जूरी के लिए
अंतिम प्रस्तुति
अंतिम विजेताओं को हमारे लॉन्चपैड पर आमंत्रित किया जाता है और डाउनस्ट्रीम भागीदारों तक पहुंच प्रदान की जाती है
चरण 1 का मूल्यांकन रोलिंग आधार पर होगा, इसलिए कृपया अपना समाधान प्रस्तुत करने की समय सीमा तक प्रतीक्षा न करें।

थे /नज लॉन्चपैड प्रोग्राम में भाग लेने का अवसर (लॉन्चपैड के 9 महीने)

प्रतिभागियोंको 25 लाख की कुल राशि प्रप्थ करने का अवसर. यह राशि उन्हीं लोगों को प्राप्त होगी जिसकी कार्यशैली में दक्षता होगी।

जो इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर, थे/नज के विशेषक सलाहकारों से सलाह प्रप्थ करने का अवसरI

वह ऐसे समुदाय से जुड़ सकते हैं जिसमें विश्व के विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तियों से मिलने और ज्ञान प्राप्त करने का अवसर पाएंगे।

Submit a solution

इस काम में कौन भाग ले सकता है?

यदि आप निम्न में से एक हैं तो आप आवेदन कर सकते हैं:

-ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर काम करने वाले संगठन और ग्रामीण/आदिवासी समुदायों में महिलाओं के लिए भूमि तक पहुंच और स्वामित्व में सुधार के लिए एक नई पहल शुरू करना चाहते हैं।

-जो संस्था पहले से ग्रामीण औरतों के भूमि और आवास योजना पर कार्य कर रहे है‌। अगर वह किसी काम में परिवर्तन लाना चाहते हैं तो वह भाग ले सकते हैं। उदाहरण में जैसे वे अपने कार्यक्रम को पुनः नया स्वरूप देना चाहते हैं।

-संगठन को भारत मे धारा ८ के तहत कंपनी एक्ट ट्रस्ट एवं सोसाइटी के स्वरूप में पंजीकृत होना आवश्यक है तथा भारत के विदेशी नियमों के तहत प्रमाण पत्र का होना आवश्यक है ( FCRA) । अगर आपको योगदान विनियमन अधिनियम के तहत प्रश्न है तो हमें कृपया (pioneer@thenudge.org) पर ईमेल करें।

विजेताओं का चुनाव किस प्रकार से होगा?

विजेताओं के चुनाव के निम्नलिखित आधार:
-समस्याओं की समझ
-समस्याओं की समाधान की स्पष्टता
-आने वाली समस्याओं को सुलझाने की क्षमता
-ग्रामीण महिलाओं पर प्रभाव (नवीनीकरण,स्केल )की संभावना
-काम के प्रति लगन और कर्मठता हो जिसके कारण समाधान समय से पूर्व हो जाए।

आप किस प्रकार से आवेदन कर सकते हैं?

यदि समाधान-सार तैयार है  तो  उसको जमा करने के लिए अप्लाई बटन पर अभी क्लिक करें और सवालों को फॉर्म में भरे 

(अगर आप अभी भी  समाधानो  पर काम कर रहे हैं और ज्ञान और संवाद श्रृंखला, पैनल चर्चा आदि के लिए ईमेल सूचनाएं प्राप्त करना चाहते हैं, तो 
रजिस्टर इंटरेस्ट बटन पर क्लिक करें और हम आपको सूचित करेंगे| आप अपना समाधान समय सीमा तक जमा कर सकते हैं)

विजेताओं को बीज अनुदान कब और कैसे वितरित किया जाएगा?

समय की अवधि में सहमत किश्तों में संगठनों को अनुदान प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक किश्त और संवितरण कार्यक्रम की राशि संगठन की जरूरतों और चरण पर निर्भर करेगी और सहमत मील के पत्थर के पूरा होने से जुड़ी होगी।

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